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Showing posts from January, 2019

डर है तो.

कल क्या होगा इसका डर अब कम है; डर है तो पनपते कलाकार का, पन्ने कितने भरूँगा इसका डर है, पन्ने भरने में कहीं अभिनय न खोजाये इसका डर है, कहीं अभिनय के डर से मैं कोई पात्र ही न समझू इसका डर है, और पात्र न समझने से कहीं कलाकार ही न बनूँ इसका डर है. डर है तो कहानी का, कहानी बनेगी या नहीं इसका डर है, बनेगी तो बिकेगा या नहीं इसका डर है; बिकेगी तो लोग देखेंगे या नहीं इसका डर है, देखेंगे तो सराहेंगे की नहीं इसका डर है. डर है तो समय का, क्या यह सही समय है इसका डर है, किसके लिए कितना समय है इसका डर है; समय मिले तो लिखूंगा या नहीं इसका डर है, और न मिले तो जियूँगा या नहीं इसका डर है. दिन बड़े लगने लगे हैं और रात थोड़ी कम, दिल में बसे अँधेरे से आँखें आज भी होती है नम; पर यह आँखों की नमी कभी अभिनय से न छूटे इसका डर है, और अभिनय से छूटे तो कभी मेरे शब्दों से न रूठे इसका डर है. कल क्या होगा इसका डर अब कम है, डर है तो...

कईओं का शोर

इंसानों का शोर, उनकी गाड़ियों का शोर, उनकी लडाइयों का शोर, उनकी चुप्पी का शोर. शोर क्या हमें कभी शांत लग सकता है? कईओं का शोर  किसी और के प्यार से  शांत होता है, कईओं का  सिर्फ अपने बैंक बैलेंस से, तो कईओं का मन चाहे खाने से और कईओं का दूसरों के लाइक्स से. मगर क्या शोर... हमें कभी शांत लग सकता है? कईओं की गाड़ियों का शोर करता है कईओं को अशांत, कईओं की सफलता का शोर करता है कईओं को अशांत, मगर क्यों... कईओं की लडाइयों का शोर करता है कईओं को शांत...? कईओं की चुप्पी के शोर से क्यों होते है कईओं ही शांत...? शोर क्या सच में... हमे... कभी शांत लग सकता है? लग सकता है.

The First Day

The air today Has an ease  About it; The kind of ease You have  In a 'head-start'.  The ease I am Talking about Dominates today; Maybe not tomorrow; Maybe never in 2019; But today... yes.  Yeah, there  Is fear as well, But somewhere behind.  Been reading  About letting go Off your fear (s); Been watching  Happy people On Instagram; Been listening  About today being   'the first day'. 'The first day'; Sounds nice...huh? Feels comfortable...hmm? Hence, at ease.